इस उम्मीद में
गुजर गई अमावस
कि अब फिर चाँद आयेगा
चाँदनी से नहायेगी
वसुन्धरा सारी
औऱ चाँदनी से होगी
शबनमी मोतियों की बरसात
महकेगी धरा सारी
आशिकों का जमघट होगी
मोहब्बत से महकेगी
धरा सारी
अम्बर में गूँजेगी
चाँदनी की किलकारी
और सराबोर होगी
मोहब्बत की मादक महक से
वसुन्धरा एक बार फिर से सारी
चाँद आयेगी गगन में
सितारों की बारात के साथ
और टिमटिमाते
और झिलमिलाते सितारे
दिल लुभायेंगें
पृियतम का हाथ
अपने हाथों में लिये
बाद मुद्दत के
आज फिर से
चाँदनी से होगी शबनमी मोतियों की
बरसात झूम उठेगा दिल
महक उठेगी अम्बर में चाँदनी
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment