Friday, 17 February 2017

चाँदनी का दीदार

इस उम्मीद में
गुजर गई अमावस
कि अब फिर चाँद आयेगा
चाँदनी से नहायेगी
वसुन्धरा सारी
औऱ चाँदनी से होगी
शबनमी मोतियों की बरसात
महकेगी धरा सारी
आशिकों का जमघट होगी
मोहब्बत से महकेगी
धरा सारी
अम्बर में गूँजेगी
चाँदनी की किलकारी
और सराबोर होगी
मोहब्बत की मादक महक से
वसुन्धरा एक बार फिर से सारी
चाँद आयेगी गगन में
सितारों की बारात के साथ
और टिमटिमाते
और झिलमिलाते सितारे
दिल लुभायेंगें
पृियतम का हाथ
अपने हाथों में लिये
बाद मुद्दत के
आज फिर से
चाँदनी से होगी शबनमी मोतियों की
बरसात झूम उठेगा दिल
महक उठेगी अम्बर में चाँदनी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव