तनहाईयाँ जब बहुत सताती हैं हमे
मेरे महबूब तुम्हारी याद आती है हमे
तनहाईयाँ लम्हा लम्हा संवर जांती है
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद आती है
तनहाईयाँ खुशगवार और रंगी हो जाती हैं
जब तुमसे पहले तुम्हारी याद दामन में समाती है
मोहब्बत की मादक महक से तनहाईयाँ महक जाती है
जब यादों के सायें पर्त दर पर्त जहन में समा जाते हैं
राहे मोहब्बत में तनहाईयों का चोली दामन का सा नाता हैं
मोहब्बत में जाँन की बाजी लगाना हमें बहुत खूब यार आता है
दिली जजबात नूरे रूखसार पे उभर आते हैं
हवाओं के मार्फत महबूब का पता हम पा जाते हैं
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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