कैसे बीते दिन वो सजनवा
तुम्हारी मोहब्बत भरी यादों के सहारे
कैसी कटी वो राते सजनवा
जब तनहाईयाँ दिलाती थी
याद उन महकते दिनोकी
जब तुम साथ थी हमारे
जिन्दगी तुमसे थी
रूह तुम्हारी याद में
कैद थी जिस्म में पृियतम
महकने लगी कायनातों फिजा
तुम्हारे गुलशन मे आने की खबर सुनकर
बेदम रूह फडफडाने लगी है
उम्मीदों का चमन सजाने लगी है
गुलशन मे तुम्हारे आने की खबर सुनकर
मनोहर यादव अमृत सागर
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