राज दिल खोलती है नजरें
बिन कहे सब कुछ बोलती हैं नजरें
आईना ए मोहब्बत आँखें यार होती हैं
लब बंद जुबाँ खामोश आँखें हाले दिल कहती हैं
मोहब्बत है तुमसे कहती हैं आँखें
नफरत है उजागर करती हैं आँखें
इझहारे मोहब्बत करती हैं आँखें
रब की इबादत में झुकती हैं आँखें
सरहदों की निगेबान होती है आँखें
नूरे रूखसार को पढ लेती हैं आँखें
मोहब्बत का इकरार करती हैं आँखें
मोहब्बत का इझहार करती हैं आँखें
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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