मोहब्बत की मादक महक की है ये खुमारी
अँखियों में बस है सनम तस्वीर तुम्हारी
मोहब्बत जिन्दगी में इनायते रब यार होती है
मोहब्बत रब की इबादत की मानिंद होती है
जमाना हँसता है यारी पे मोहब्बत पे
महबूब के अश्कों से वसुन्धरा भी सिसकती है
अंजामें मोहब्बत से वाकिफ जमाना होता है
मोहब्बत में जा लुटाना फलसफा पुराना होता है
उऩकी मोहब्बत में हरेक बाजी खेल जायेगें
गर जरूरत पडी तो जाँ अपनी लुटायेंगें
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment