Wednesday, 15 February 2017

मोहब्बत

तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
महक उठी है सनम जिन्दगी यार हमारी
महकी महकी सी है कायनातों फिजा सारी
महकी चहकी सी है यारी जिन्दगी हमारी
तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक से
हमने तोड दी है दुनियाँ की सरहदे सारी

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव