एक प्यार भरी पप्पी दुनियाँ के गम भुलाती है
सहराओ में कुमुदनी यार खिलाती है
जिन्दगी में बासंती बहार यार लाती है
जिन्दगी जीने का अंदाज बदल जाती है
एक मोहब्बत भरी झप्पी सैलाभे खुशियाँ लाती है
एक पल में गैर को भी अपना यार बनाती है
दर्दे गम के मंजर से एक पल में उबार लाती है
अषाड की उमस में सावन की शबनमी फुहार बन जाती है
एक मोहब्बत भरी पप्पी अमावश का शाप हरती है
पूनम की शबनमी चाँदनी बन वसुन्धरा को मोतियों की चादर उढाती है
शत्रुता पलक झपकते भुलाकर यार अपना बनाती है
वसुन्धरा पर मादक कोहरे की मानिंद प्यार बढाती है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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