Saturday, 25 February 2017

मोहब्बत

सागर की गहराईयों में डूबकी लगाओगें माणिक्य पाओगे
अँखियों के रास्ते महबूब के दिल की गहराईयों में बस जाओगें
अपनी मोहब्बत की मादक महक से वादियें दिल तुम महकाओगें
उनकी बेवफाईयों को भुलाके आशियाना ए दिल की मलिका बनाओगे !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव