Monday, 3 December 2012

564 -568 एवरेस्ट के पर्वत शिखर हसीं मनोरम

564

एवरेस्ट के पर्वत शिखर हसीं मनोरम 

मधुशाला का है मान बढ़ाते ,

जो कोई है शिखर फतह करने है आता 

उसको जीवन देते पैमाने 

565

दिल में धधक रही ज्वाला 

प्यास बुझाएगी अब सुरबाला 

बड़े अरमानो से लिए खड़ी है 

सुन्दर कर में मनोहर हाला 

566

अंतर  मन में धधक रही थी ज्वाला 

पैमानों में मचल रही थी हाला 

सुरब्बाला के कोमल कर में 

मचल रहा था मादक प्याला 

567

मधु तुम मधूशाला की मधू हो 

मेरे प्याले की पावन हाला 

अब तुम मेरी प्यास बुझा दो 

अपने कर से पिलाकर हाला 

568

तुम ही मेरे जीवन की ज्योति हो 

तुम ही मेरा जीवन हाला 

अब तुम्ही मुझे राह दिखादो 

अनजान पथिक को डगर बता दो 

  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव