Monday, 3 December 2012

569-570 अँधेरी रात में शमा जला दो

569
सर्वोत्तम हाला हो मधुशाला की तुम
रूपवती सुन्दर सुरबाला
यौवन हाला का छलकता प्याला
मेरे दिल की मलिका मधुबाला
570
अपने आगोष  में लेकर मुझको
यौवन रस की पिलादो हाला
दीवाना बनाकर हमको अपना
अँधेरी रात  में शमा जला दो


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव