Wednesday, 5 December 2012

सारे जग में ,प्रसिद्ध हुई 576-578

576

बाबूजी की पीड़ियो से ठहरी थाती

तुम प्रिय मधुशाला ,

कभी ना उन्होंने डगर निहारी ,

कभी ना पकड़ा कर में प्याला !

577

बिग बी के होठों से निकली एक

स्वर लहरी मनोरम ,

सारे जग में ,प्रसिद्ध हुई

बाबूजी की पावन मधुशाला

578

जब भी गुजरता ,तेरी गली से

हौले 2 अपना हाथ हिलाती

दिल में मेरे उमंग जगाती 

अपने पास बुलाती सुरबाला !

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव