Thursday, 6 December 2012

सारा जहाँ है आशिक तुम्हारा ,कबतलक खुद को बचाओगे तुम !

101

हमसे जितना दूर जाओगे तुम ,उतना ही अपने करीब पाओगे तुम !

हमें जितना भुलाओगे तुम ,उतना ही ज्यादा याद आओगे तुम !!

102

नजरो से भले ओज़ल हो जाओ ,दिल से निकालने ना पाओगे तुम !

अब तो कैदी हो तुम मेरे दिल के ,भाग कर अब कहाँ जाओगे तुम !!

103

जहाँ तक जायेंगी नजरे तुम्हारी ,हमी हम को पाओगे तुम !!

बहुत कातिल है नजरे तुम्हारी ,बिना खंजर के मार गिराओगे तुम !!

104

तुम्हारी हर अदा बहुत है निराली , कबतक उन्हें छुपाओगे तुम !!

संगेमरमर सी सुन्दर है काया तुम्हारी , कबतलक बुरके में छिपाओगे तुम !!

105

सारा जहाँ है आशिक तुम्हारा , कबतलक खुद को बचाओगे तुम !

 मेरे दिल को अपना कुटीर बना लो , यही रहकर खुद को बचा पाओगी तुम !!  

106

पथिक मनोहर रस्ता निहारे , और कबतलक तडपाओगे तुम !!

अब तो यौवन भी ढलने लगालगा है , और कितना इनतजार करवाओगे तुम !!


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव