Thursday, 6 December 2012


मालिकाए हुस्न के अंदाज बड़े निराले है

 22/16/22के पाले है ,

 फुर्सत में गड़ा है पाक परवरदिगार ने ,

उसकी अनुपम रचना के

 हम कायल है 

तेरे चंचल नैन कहानी कहते है ,

तुझे लब खोलने की जरुरत ही नहीं 

नैनो की जबानी कहते है 

तेरे कातिल लब कयामत ढा रहे है

 तेरे हुस्नों सौन्दर्य में चार चाँद लगा रहे है

 गैरो की क्या बात कहू

 हम तो तेरे अपने है

 इसलिये तुझे दिल से अपना रहे है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव