जी बहुत बहुत आभार आपके बहुत उम्दा के एवज मे आपके समक्ष आया है
बा अदब सर झुकाकर कृतक अंजान डगर ने आपकी खिदमत मे शुक्रिया मेरे हुजूर फरमाया है
बा अदब सर झुकाकर कृतक अंजान डगर ने आपकी खिदमत मे शुक्रिया मेरे हुजूर फरमाया है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment