तेरी सोच जहाँ मे सबसे ऩिराली है
मोहब्बत के उपवन से महक आली है
भोर मे खिलती कलियों की मुसकुन सी महकती
अम्बर की चाँदनी सी चहुओर बिखेरती चिडियों सी चहकती
मोहब्बत के उपवन की मुसकुराहट तुमसे है
कायनात और फिजा की मादक झन्कार हो तुम
मोहब्बत का लरजता हुआ आईना दीदारे यार
कायनात मे सभी तुम्हारी दोस्ती की महक
से वाकिफ है यार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 5 February 2016
तेरी सोच
मोहब्बत की अंजान डगर पर
मोहब्बत की अंजान डगर पे चलना संभले
यहाँ जो भी आया गया हाथ मलके
मोहब्बत की डगर महकती है चाँदनी से
हुस्न निखरता है दीदारे यार से प्यार से
मोहब्बत भरे अल्फाजो का हुजूम
प्यार की रंगत से निखरता है हुस्ने यार
नजरो ने नजरो से
नजरों ने धीरे से कुछ कहा है नजर से
नजरो ने हौले से क्या कुछ कहा नजर से
नजरो ने नजरो ही नजर मे पैगामे मोहब्बत
दिल को अवगत कराया है
नजरो के पैगामे मोहब्बत पर दिल को एतबार आया है
बिन कजरा
बिन काजल पलको का सिन्गार अधूरा लगता है
बिन कजरा के दीदारे यार अधूरा लगता है
ज्यो बिन गजरा के गोरी के जुल्फो का सिन्गार अधूर लगता है
बिन सावन के महबूबे मोहब्बत की मोहब्बत का इझहार अधूर लगता है
ध्यान मुदृा मे
बिन काजल पलको का सिन्गार अधूरा लगता है
बिन कजरा के दीदारे यार अधूरा लगता है
ज्यो बिन गजरा के गोरी के जुल्फो का सिन्गार अधूर लगता है
बिन सावन के महबूबे मोहब्बत की मोहब्बत का इझहार अधूर लगता है
आरजुये दिल है
आरजुये दिल है मोहब्बत तुम्हारी
हरेक अदा आपकी लगती है प्यारी
अंजान नही मसीहा ए मोहब्बत हो तुम
तुम्हारी मोहब्बत सबब ए जिन्दगी हमारी
जिन्दगी हो तुम महबूबे मोहब्बत हमारी
बिन आपके जिन्दगी दुश्वार है महबूब हमारी
बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
साक्छात सरस्वती लबो से बोलती पृतीत होती है
पठानकोट की सैनिक गाथा शब्दो मे छवि पृकट होती है
माँ के नाम संदेशा फिर पत्नि बहन बेटी बेटा का हाल बताती है
थमते नही अश्क आँखो से सैलाभे अश्क जगाती है
तुम्हारी अमृत सम अनुपम कृति पूनम दिल को सरेशाम जगाती है
गुँजरे हुये वक्त की यादें
गुँजरे हुये वक्त की यादे दिल को बहुत तडपाती है
कभी कभी जिन्दगी को जनन्त और कभी....बनाती है
मोहब्बत मे लबरेज दिल को बहुत दर्द दे जाती है
कभी कभी मोहब्बत मे दिल को चेनो शुकून भी पहँचाती है
बहुत रूलाती है मोहब्बत आपकी
बहुत रूलाती है तेरी मोहब्बत
तनहाईयो मे तडपाती है तेरी मोहब्बत
बहुत भली है तेरी यादे साया बन साथ निभाती है
अश्को संग मन की गति से शुकून दिल को पहँताती है
मम कृति
मम कृति लहूलुहान आज है भौंडा ये सोभ्य समाज
रिश्ते सब तार तार हो चुके बिखर चुकी ये जिन्दगी जहाँ
आसमां का चाँदनी भी सहमी सहमी सकुची सी कसक लिये मनमे
अंजान डगर का खौफ लिये मन मे आगे बढ रही कुछ सकुचाई
नींद भी खौफजदा सी लगती जाने क्या हो अगले पल
अंजान कृतक वीरान डगर कुम्लाई सकुचाई नन्ही कुमुदनी
भोर का तारा लगता प्यारा एक आस विश्वास लिये मन मे
बढते लगती अपनी डगर सजल सजग नन्ही कुमुदनी
महबूबे मोहब्बत के
महबूबे मोहब्बत के तीरे नजर के घायल है हम
उनकी चाँदनी की सी दमकती अदाओ के कायल है हम
अम्बर से चाँद
अम्बर से चाँद खुद ब खुद चलके आया
मेरे महबूब तेरे रूखसार ने गजब ढाया
कनक मे लिपटी तू है कनक या कनक तू
मेरे महबूब अब तलक नही ये समझ आया है
जितनी सुँदर कृतिका हो तुम
जितनी सुन्दर कृतिका हो तुम
उतनी सुन्दर कृति मित्र तुम्हारी
दिल पर यु जाती है पृियतम
जैसे वसुन्धरा की सी छवि तुम्हारी
चीर हरण
कलियुग मे कविता के चीर हरण का पृयास चहुदिशी जारी है
कल सरेशाम निशा लहुलुहान हो गई आज सँध्या हुई दुखियारी है
आधुनिकता का आडंबर देशीलिबाज पर लगता बहुत भारी है
हे पाक परवरदिगार कृतक की कृति की लाज राखजो हुई दुखियारी है
महकता है समाँ
बहुत लाजवाब और खुबसूरत लिखती है आप
दिल के सोये हुये अरमान आँदोलित दोस्त होते है
ख्वाबो और ख्यालो मे ए दोस्त हम साथ होते है
महकता है समाँ महकती है फिजा जब दीदारे यार होता है
कवियत्री की कविताओ की मादक महक से दिली एतबार
मेरे दोस्त मेरे यार होता है मेरे दोस्त मेरे यार होता है
तेरी बिखरी हुई जुल्फो ने
तेरी बिखरी हुई जुल्फो ने सितम दिल पे ढाया है
गुलाबी हँसी रूखसार ने दिल कृतक अंजान का चुराया
चँदा की चाँदनी ने दिल चकोर का भरमाया है
तेरी मरमरी जिस्म ने दिल मे भूचाल मचाया है
देखो सनम सावन के सुहाने मौसम मे पपीहे ने गीत गाया है
तेरी मोहब्बत के बिन मै जी ना पाउँगा गर तू न मिली तो मै जीते जी मर जाउँगा
तेरी मोहब्बत के बिन मै जी ना पाउँगा
गर तू न मिली तो मै जीते जी मर जाउँगा
दुनिया के हुजूम मे
दुनिया के हुजूम मे सिर्फ तेरी मोहब्बत पे एतबार करते है
ए चाँद की शबनमी चाँदनी हम तो तेरी चाहत मे जीते हैं मरते हैं
मेरे महबूब ने
मेरे महबूब ने नजरों के मार्फत दिल पे मोहब्बत भरा तीर चलाया है
घायल हुआ दिल बेचारा सँभल का अवसर भी नही पाया
चारो खाने चित हुआ मोहब्बत का मारा आशिक परदेशी बेचारा
जिन्दगी की आरजु समझ बैठा परदेशी भंवर अंजान डगर बेचारा
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई