Sunday, 8 May 2016

कुदरत की हरेक शंय में तेरा दीदार करता हूँ

कुदरत की हरेक शंय में
तेरा दीदार करता हूँ
जिन्दगी तुझसे बहुत प्यार करता हूँ
तेरी चाहत में जीता हूँ
तेरी चाहत में मरता हँ
बेशुमार प्यार तुझसे करता हूँ
तेरी मोहब्बत में जल बिन मछुरी सा तडपता हूँ
दिन रात आहें भरता हूँ
जिन्दगी बेपनाह मोहब्बत तुझसे करता हूँ
जिन्दगी आ तुझको गले लगा लू मैं
बाहों में भरके खुदकों तुझमें समां लूँ मैं
जिन्दगी तुझमें इस कदर खो जाउँ मैं
तेरी मोहब्बत में खुद को भुलाउँ मैं
तेरे सिवाँ किसी और को नजर न आउँ मैं
जिन्दगी तेरे दिल के आशियाने में जिन्दगी बिताउँ
जिन्दगी आखिरी ख्वाहिश है यही तेरी बाहों में समाउँ मैं

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