जिन्दगी तेरा दीदार कर रहा हूँ
तुझसे जी भर के प्यार कर रहा हूँ
बहुत ही करीब से जी रहा हूँ
गरल पल पल हरेक पल पी रहा हूँ
मरमर के जी रहा हूँ गरल पी रहा हूँ
हरेक मोड पर दीदार तेरा करता हूँ
तेरे आगोश में मुस्कुराता हूँ सर अपना झुकाता हूँ
जिन्दगी तुझसे बहुत प्यार करता हूँ
हरेक मोड पर हरेक डगर पर दीदार तेरा करता हूँ
कभी बाँहों में भरता हूँ कभी सीने से लगाता हूँ
तेरे दामन में खुद को समेटकर मुस्कुराता हूँ
तुझसे मैं हूँ मुझसे से धरा और आसमाँ नहीं
ये सब सोच सोच कर तनहाइयों के दामन में मुस्कुराता हूँ
बेपनाह मोहब्बत तुझसे करता हूँ
तेरे दीदार को जल बिन मछुरी सा तडपता हूँ
जिन्दगी तेरी हरेक आहट पे कभी मुस्कुराता हूँ
कभी कभी बेशुमार अश्कों से तेरा दामन भिगाता हूँ
माँ की असीम ममता तुझमें पाता हूँ
तेरे चरणों में सर सदा झुकाता हूँ
महबूब की मोहब्बत में इन्दृधनुष के मानिंद मुस्कुराता हूँ
रिश्ते नातो की चकाचौंध में खुद को चौराहें पे खडा पाता हूँ
बेखबर नहीं तुझसे वाकिफ हूँ मैं सब कुछ जानता हूँ
सदियों से तेरी मोहब्बत पहचानता हूँ
तेरी महक से तेरी आहट से अंजान नहीं हूँ
तेरे आगोश में आकर तनिक भी परेशाँ नहीं हूँ
आ जिन्दगी जाने क्यों इन फिजाओ से इन हवाओ से उबने लगा हूँ मैं
जिन्दगी गले लगालें तू अपनी बाहों में भरके खुद में समालें तू
जिन्दगी तुझसे बहुत प्यार करने लगा हूँ
रात दिन तनहाइयों में तेरा इन्तजार करने लगा हूँ मैं
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 8 May 2016
जिन्दगी तेरा दीदार कर रहा हूँ मैं
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