Monday, 16 May 2016

तेरे नूर से रौशन

तेरे नूर से रौशन है कायनातों फिजा सारी
तुम्ही ख्वाहिशे दिल तुम्ही से दुनियाँ हमारी
तुम्हारी नजरों सूरज चँदा कोटी अम्बर के तारे
सदियों से चाहते दिल हो हमारी मनमोहन प्यारे

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मोहब्बत से लबरेज कविताओ का खजाना
साँझ ढले तो आ जाना
अमृत सागर मे डुबकी लगाना चले आना

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव