हर दिन होली हर रात दिवाली दुल्हन सी सजती मेरी मधुशाला
टप टप टपटप सागरमय से अविरल है टपकती सागरमय हाला
रोज़ यहाँ लगाती बाज़ी और प्रकाश बिखेरती आधुनिक दीपमाला
इंद्र धनुषी रंगो से सजती और संवरती मेरी आधुनिक मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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