बने रहे विशाल वृक्ष महुये के जिनसे मिलती दिव्य अनुपम हाला
खेतों में लहराते रहे गन्ने और पकती रहे शबनमी मादक हाला
अंगूर लताओं में झूमे और नित नित जश्न मने मेरी मधुशाला
नित नव डगर आते रहे नव परदेशी झूमती हाला पिलाये सुरबाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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