Friday, 10 June 2016

०५६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ




हाला पीके  जोश है आता कभी कभी परदेशी होश गंवाता
आज तलाक जो कहने न पाया पीके हाला वह कह जाता
तनिक नहीं परदेशी घबराता नई समय से पिने आता
मेरी मधुशाला की पावन डगर परदेशी कभी न भुलाता 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव