Friday, 10 June 2016

०५७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



हरेक डगर जाती मंजिल नज़र आती मेरी आधुनिक मधुशाला
जिस और आँखों की पुतली यारों फिरती नज़र आती सुरबाला
रूपसी ने ऐसा जादू डाला आँखों को रास आती मधु व् प्याला
झूम उठता है तन मन मनोहर प्यारे पीके सागरमय हाला

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव