Friday, 10 June 2016

०५८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



साकी बन माधव आज आये लेकर कर में अनुपम प्याला
जिससे अविरल छलक रही थी अमृतसम अनुपम हाला
देव दानव के सागर मंथन से निकली सागरमय मादक हाला
अमृतसम हाला पीके झूम उठा ग्वाल मनोहर दिलवाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव