Friday, 10 June 2016

०५९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



स्वर ताल समेकित बसंत कुमार किशोर दा आज आये
झूमते गाते सबके दिल को कामदेव सैम किशोर भाये
मेरी मधुशाला के चौबारे झूम बराबर झूम शराबी गाये
मेरी मधुशाला में दादा की स्वरलहरी ने समां आज बँधाये 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव