स्वर ताल समेकित बसंत कुमार किशोर दा आज आये
झूमते गाते सबके दिल को कामदेव सैम किशोर भाये
मेरी मधुशाला के चौबारे झूम बराबर झूम शराबी गाये
मेरी मधुशाला में दादा की स्वरलहरी ने समां आज बँधाये
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment