Friday, 10 June 2016

०६० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कृतक अंजान डगर साकी बनआये आते ही मेघ सम छाये
सदियों से जिनकी बपौती मधुशाला हरख हरख जस गाये
कृतक प्रेयसी सुरबाला ने सप्त सुरों की स्वर लहरी पे नग्मे
प्यार मोहब्बत मेरी आधुनिक मधुशाला और हाला के गाये 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव