Friday, 10 June 2016

०६१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


आज बरखा बन साकी आई मेरी आधुनिक मधुशाला छाई
अम्बर से धरा तक कड़की काले घनियारे मेघों ने झड़ी लगाईं
सागरमय की सुनामी आई मेरी मधुशाला में बजी शहनाई
कृतक अंजान डगर मनोहर और बाला की स्वरलरी ने धूम मचाई 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव