Sunday, 5 June 2016

०१० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



देशियों परदेशियों के दिल में जा बैठी रूपसी की सागरमय हाला 
नित्य डगर पर मेला लगता नवयौवना सी सजती मेरी मधुशाला 
मादक लबों से प्याले टकराते और मचलती सागरमय हाला 
रूपसी के सौंदर्य का जादू चलता और मचलती मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव