Sunday, 5 June 2016

००९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


अब तो जीवन की चाहत बन बैठी सुरबाला की सागरमय हाला
जन्नते हूर रूपसी बन बैठी कृतक अंजान की आधुनिक मधुशाला
परदेशियों के दिल पर रूपसी बाल की सागरमय ने ऐसा  जादू डाला
एक बार जो पी  लेता सागरमय हाला रोज़ ही मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव