Sunday, 5 June 2016

००८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



सदियों से अंजान डगर पर मैंने सार जीवन यु ही बिता डाला 
बाद मुद्दत के मन्जिल  मैंने पाई मेरी आधुनिक मधुशाला 
रूपसी की सागरमय मादक हाला  ने जीवन पल में बदल डाला 
जिसकी चाहत मुद्दत से थी अमृतसम  दिव्य  अनुपम हाला  

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव