Saturday, 4 June 2016

००७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


कभी न मधुशाला जाने को निकलता परदेशी अंजान निराला
स्वत: डगर बदलती मादक महक मेरी आधुनिक इ मधुशाला
पथ भ्रमित हो जाता परदेशी और पाता अनुपम मादक हाला
कृतक दिल भी झूम उठा पीकर रूपसी के मादक लबों से हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव