१९६ मेरी आधुनिक मधुशाला
जन्नते हूर रूपसी कमसिन बाला साकी बन आई मेरी मधुशाला
लचीली कमरिया पर सागरमय शोभित कर में अनुपम प्याला
बाला की मादक हाला से कायनात महक रही समां हुआ निराला
कुदरत के खुशाल चितेरे ने मेरी मधुशाला का समां बदल डाला
जन्नते हूर रूपसी कमसिन बाला साकी बन आई मेरी मधुशाला
लचीली कमरिया पर सागरमय शोभित कर में अनुपम प्याला
बाला की मादक हाला से कायनात महक रही समां हुआ निराला
कुदरत के खुशाल चितेरे ने मेरी मधुशाला का समां बदल डाला
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