Thursday, 16 June 2016

९७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कृषक आज साकी बन आया मेरी आधुनिक मधुशाला
पीके मदमस्त हुआ मेहनती कृषक हल जोतने वाला
बहुत मधुर है अमृतसम अनुपम मेरी मधुशाला की मादक हाल
आज पिलाऊँगा लहलहाती फसलों को सुरबाला की अमृत हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव