१९५ मेरी आधुनिक मधुशाला
सिंधु और गंगाजल जल सैम शीतल महुये की मादक हाला
पीके दिलो दिमाग चैन है पाता दिव्य मनोहर अनुपम हाला
सियाचिन के हिमनद सम शीतल सागरमय मादकतम हाला
पीके रूह तक हिल जाती लगता कृतक जन्नत आ पहुँचा निराला
सिंधु और गंगाजल जल सैम शीतल महुये की मादक हाला
पीके दिलो दिमाग चैन है पाता दिव्य मनोहर अनुपम हाला
सियाचिन के हिमनद सम शीतल सागरमय मादकतम हाला
पीके रूह तक हिल जाती लगता कृतक जन्नत आ पहुँचा निराला
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