१९४ मेरी आधुनिक मधुशाला
स्वर्णिम सुकोमल मादक महुये से छनकर आती मादक हाला
स्वर्ण कमल की अनुपम नाजुक पंखुड़ियों से मिलके बन प्याला
परदेशी भ्रमर बन साकी आज आया मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल ख़ुशी से झूम उठा पीके महुये की दिव्य अनुपम मादक हाला
स्वर्णिम सुकोमल मादक महुये से छनकर आती मादक हाला
स्वर्ण कमल की अनुपम नाजुक पंखुड़ियों से मिलके बन प्याला
परदेशी भ्रमर बन साकी आज आया मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल ख़ुशी से झूम उठा पीके महुये की दिव्य अनुपम मादक हाला
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