Thursday, 16 June 2016

१९४ मेरी आधुनिक मधुशाला

१९४  मेरी आधुनिक मधुशाला

स्वर्णिम सुकोमल मादक महुये से छनकर आती मादक हाला
स्वर्ण कमल की अनुपम नाजुक पंखुड़ियों से मिलके बन प्याला
परदेशी भ्रमर बन साकी आज आया मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल ख़ुशी से झूम उठा पीके  महुये की दिव्य अनुपम मादक हाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव