Friday, 10 June 2016

०५५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



अन्धकार में खूब निखरती अनुपम मादक हाला मेरी मधुशाला
हर गली हरेक मोड़ पे रोज़ ही सजती मेरी आधुनिक मधुशाला
नूर बरसता आँखों से कमसिन लबो से टपकती मादक हाला
रूपसी सुरबाला का रूप मनोहर कृतक अंजान को लगता प्यारा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव