Friday, 10 June 2016

लबों पर हँसी

लबों पर हँसी ख्वाहिशे आम हो गयी
तुम्हारी राह तकते तकते जिन्दगी की शाम हो गयी

गमों से तौबा कर लबों पे हँसी सजोई हमने
जिन्दगी में बनावटी महक आज आम हो गयी है

दूर डगर से बहुत दूर तनहाइयों का बसेरा है
जिन्दगी की दौड में तेरा मेरा कोई नही बाबा वाला डेरा है

जिन्दगी और रूसवाईयों का रिश्ता बहुत पुराना है
जोगी वाला चिमटा जिन्दगी का रिश्ता निभाना है

लम्हा लम्हा बीत रही है जिन्दगी पृियतम की विरह में
तिल तिल जल रही है जिन्दगी ज्यो बंबू वन में दावानल

कुछ भी तो न पाया हमने जमाने से सिवा सैलाभे गम
हसरत यही हमारी सभी पायें खुशियाँ न हो किसी की आँखें नम

जिन्दगी जिये जा रहे हैं पीकर हलाहल हरेक पल
कर तू जिन्दगी से मोहब्बत मेरे यार
ये जिन्दगी रब की नेमत मेरे यार

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव