Sunday, 5 June 2016

०१४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


परदेशी पाने को मचलते मादक प्याला  भाव न देती रूपसी बाला 
आधी रात ढले परवान जब हुस्न मचलता जन्नत लगाती मधुशाला 
साकी की प्याली में मचलती दिव्य  अनुपम सागरमय मादक हाला 
झूम उठा परदेशी पाकर सुरबाला के कर से सागरमय अनुपम हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव