Sunday, 5 June 2016

०१३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



रूपसी सुरबाला के कर में शोभित दिव्य अनुपम सागरमय हाला 
मरमरी बाल के कर से टकराकर अमरतसम हो जाता मादक प्याला 
परदेशी पाने को मचलते रूपसी के सागरमय से टपकती हाला 
यौवन की प्याली मचलती और झूम उठती मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव