Sunday, 5 June 2016

०१२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



प्यालों  से प्याले टकराते लबों  को चूमती अनुपम सागरमय हाल 
महफ़िल में सुरबाला ठुमकती हवा में उड़ती  मेरी आधुनिक मधुशाला 
रूपसी जब लबो से चूमती अमृतसम हो जाती सागरमय मादक हाला 
संगीत की मादक स्वरलहरी पर झूम उठते कृतक मेरी मधुशाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव