Saturday, 4 June 2016

००५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



महकते महुवे को खौला  कर वन में आज बनाउ पेय निराला
जिसे पीकर तन मन झूम उठे और नाच उठे कृतक निराला
कृतक फिर बन जाये साकी भरके प्याले में मादक हाला
इ पाठक दिल से पढ़े मेरी आधुनिक सागरमय  इ मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव