Monday, 13 June 2016

१७९ मेरी आधुनिक मधुशाला

१७९ मेरी आधुनिक मधुशाला 

तुम पुनम के चाँद शबनमी मोतियों की झड़ी लगाना मधुशाला के आँगन 
शेफाली की मादक महक से महकेगी मेरी  मधुशाला झूम उठेगा तन मन 
झूम उठेगा तन मन जब लबो से टपकेगी सागरमय मधुशाला के आँगन 
मधु का मादक प्याला सैम लगाती रूपसी बाला कृतक थामे उसका दामन 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव