१७९ मेरी आधुनिक मधुशाला
तुम पुनम के चाँद शबनमी मोतियों की झड़ी लगाना मधुशाला के आँगन
शेफाली की मादक महक से महकेगी मेरी मधुशाला झूम उठेगा तन मन
झूम उठेगा तन मन जब लबो से टपकेगी सागरमय मधुशाला के आँगन
मधु का मादक प्याला सैम लगाती रूपसी बाला कृतक थामे उसका दामन
तुम पुनम के चाँद शबनमी मोतियों की झड़ी लगाना मधुशाला के आँगन
शेफाली की मादक महक से महकेगी मेरी मधुशाला झूम उठेगा तन मन
झूम उठेगा तन मन जब लबो से टपकेगी सागरमय मधुशाला के आँगन
मधु का मादक प्याला सैम लगाती रूपसी बाला कृतक थामे उसका दामन
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