Monday, 13 June 2016

१८० मेरी आधुनिक मधुशाला

१८०  मेरी आधुनिक मधुशाला 

मेरी मोहब्बत मेरी मधुशाला मेरी मोहब्बत दिव्य अनुपम प्याला 
तुम अमृतसम सागरमय मादकतम हाला मेरी मोहब्बत सुरबाला 
तुम्हे समझकर अनुपम मादक हाला लबों से पी जाऊ मादक प्याला 
कृतक अंजान डगर सदियों से डगर तुम्हारी निहारता रूपसी बाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव