१०० मेरी आधुनिक मधुशाला
चाँदनी के शबनमी मोती समेटकर नित नई बनाता अनुपम हाला
महबुबे मोहब्बत की विरहाग्नि में तपाकर बना लाता उससे प्याला
अपनी दिली स्मृतियों में सहेजकर जी भर भरता मादक प्याला
आज पाठक है साकी और वही पाठक ई मादक हाला पीने वाला
चाँदनी के शबनमी मोती समेटकर नित नई बनाता अनुपम हाला
महबुबे मोहब्बत की विरहाग्नि में तपाकर बना लाता उससे प्याला
अपनी दिली स्मृतियों में सहेजकर जी भर भरता मादक प्याला
आज पाठक है साकी और वही पाठक ई मादक हाला पीने वाला
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