Saturday, 11 June 2016

१०० मेरी आधुनिक मधुशाला

१००  मेरी आधुनिक मधुशाला


चाँदनी के शबनमी मोती समेटकर नित नई बनाता अनुपम हाला
महबुबे मोहब्बत की विरहाग्नि में तपाकर बना लाता उससे प्याला
अपनी दिली स्मृतियों में सहेजकर जी भर भरता मादक प्याला
आज पाठक है साकी और वही पाठक ई मादक हाला पीने वाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव