११० मेरी आधुनिक मधुशाला
अपने मादक अल्फाजों की कृतक नित्य बनाता मादक हाला
मन मस्तिष्क की अनल से पका लाता अनुपम मादक हाला
कभी न हाल खत्म है होती कोटी कोटी पिए नित पीने वाला
मेरे पढ़ने वाले इंजिनियर वैज्ञानिक कम्प्यूटरी कृत पीते हाला
अपने मादक अल्फाजों की कृतक नित्य बनाता मादक हाला
मन मस्तिष्क की अनल से पका लाता अनुपम मादक हाला
कभी न हाल खत्म है होती कोटी कोटी पिए नित पीने वाला
मेरे पढ़ने वाले इंजिनियर वैज्ञानिक कम्प्यूटरी कृत पीते हाला
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