Saturday, 11 June 2016

११० मेरी आधुनिक मधुशाला

११०   मेरी आधुनिक मधुशाला

अपने मादक अल्फाजों की कृतक नित्य बनाता मादक हाला
मन मस्तिष्क की अनल से पका लाता अनुपम मादक हाला
कभी न हाल खत्म है होती कोटी कोटी  पिए नित पीने  वाला
मेरे पढ़ने वाले इंजिनियर वैज्ञानिक कम्प्यूटरी कृत पीते हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव