Saturday, 11 June 2016

१०९ मेरी आधुनिक मधुशाला

१०९    मेरी आधुनिक मधुशाला

अंगूर की बेटी बन साकी आई आज मेरी आधुनिक मधुशाला
भर भर प्याले सबको पिलाती दिव्य अनुपम अमृतसम हाला
हाला जब स्वयं चखी खुद को भुला बैठी सबनमी अंगूरी बाला
कृतक ह्रदय अति गौर्वान्वित भयो देख समां मस्त निराला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव