१०९ मेरी आधुनिक मधुशाला
अंगूर की बेटी बन साकी आई आज मेरी आधुनिक मधुशाला
भर भर प्याले सबको पिलाती दिव्य अनुपम अमृतसम हाला
हाला जब स्वयं चखी खुद को भुला बैठी सबनमी अंगूरी बाला
कृतक ह्रदय अति गौर्वान्वित भयो देख समां मस्त निराला
अंगूर की बेटी बन साकी आई आज मेरी आधुनिक मधुशाला
भर भर प्याले सबको पिलाती दिव्य अनुपम अमृतसम हाला
हाला जब स्वयं चखी खुद को भुला बैठी सबनमी अंगूरी बाला
कृतक ह्रदय अति गौर्वान्वित भयो देख समां मस्त निराला
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