Saturday, 11 June 2016

०६४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


बादलों की गोद खेलती किलकारी मारती कमसिन बिजुरिया
मेघों  से बरसती सागरमय अमृतसम अनुपम  मादक हाला
बिजुरिया के निर्मल नूर से शोभित मेरी आधुनिक मधुशाला
मेघों से बरसती  अनुपम हाला पीके परदेशी हुआ मतवाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव