Saturday, 11 June 2016

०६५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ




देवराज बन साकी आया मेरी आधुनिक मधुशाला के चौबारे
ढोल नगाड़े दुन्दुभी की थाप पे ठुमकती सुरबाला मधुशाला
इंद्रलोक की  अमृतसम मादक हाला पीके मन हुआ मतवाला
कृतक अंजान मग्न हो गये समां मेरी आधुनिक मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव