Saturday, 11 June 2016

०६६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मृदुल भोर में टपटप टपकते मादक महुये की मैंने बनाई मादक हाला
मेरे महबुबे मोहब्बत मेरे सनम अपने लबों से आज पिलाऊँगा प्याला
प्रथम अधिकार मेरे महबूब तुम्हारा फिर सुर असुर और जहाँ  पायेगा
सर्प्रथम मेरी मादक हाला का भोग मेरा महबूब मेरा प्रियतम लगाएगा 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव