Tuesday, 7 June 2016

तेरी चरण रज जो मिल जाये कन्हाया

तेरी चरण रज जो मिल जाये कन्हैया

तेरी चरण रज माखन मिसरी से प्यारी लगती है
कान्हा बृन्दावन की कुन्ज गलियाँ राजमहल से प्यारी लगती है
हरेक डगर से कन्हैया तेरे आने का भान होता है
राधा की मनोहर मुस्कान गुँजती मुरलियाँ का भान होता है
कान्हा तेरी मुरलियाँ की तान दिल चुराती है
हमारे पर जादू मोहब्बत का चलाकर अपना बनाती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव