हरेक बरस आती होली रंग बरसाती रूपसी बाला और बरसती हाला
हरेक बरस आती दीवाली शतरंज की लगाती बाजी छलकति हाला
पर यारो नित यौवन रूपसी बाला कृतक अंजान डगर की मधुशाला
हरेक रात होली मनाता परदेशी हैक दिन हाल छलकाती सुरबाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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