Monday, 6 June 2016

०३५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ - amrit Sagar


हरेक बरस आती होली रंग बरसाती रूपसी बाला और बरसती हाला
हरेक बरस आती दीवाली  शतरंज की लगाती बाजी छलकति हाला
पर यारो नित यौवन रूपसी बाला कृतक अंजान डगर की मधुशाला
हरेक रात होली मनाता परदेशी हैक दिन हाल छलकाती सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव